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इंडियन एक्सप्रेस में धार्मिक पहचान और बुर्का पर पांच दिन लंबी बहस की श्रृंखला चली. अतुल ने इसे एक महत्वपूर्ण पहल बताया लेकिन सवाल उठाए कि इसमें एक भी लेखक मुस्लिम नहीं था. न ही किसी मुस्लिम महिला का पक्ष आ सका.
उन्होंने न्यू़ज़लॉन्ड्री की पूर्व सहयोगी शेहला का बुर्के को लेकर राय पैनल से साझा किया. शेहला ने कहा था कि बुर्का उनके लिए अब एक पॉलिटिकल स्टेटमेंट है.
इस मसले पर समन कुरैशी का मानना था कि जिस तरह राइट विंग फ़ण्डामेंटालिस्ट नुकसानदेह हैं उसी तरह लिबरल फ़ण्डामेंटालिस्ट भी एक बड़ा ख़तरा हैं जो अपने मुताबिक चीजों को थोपते है. |