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Description:
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A 1964 recording.
राजेंद्र रघुवंशी ने यह भाषण 1964 में अनामिका के तत्वावधान में हुए रंगकर्म सम्बन्धी एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में दिया था। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे थे इब्राहीम अल्काज़ी और प्रतिभागियों में श्यामानंद जालान, शम्भू मित्र, बलराज साहनी, सत्यदेव दुबे और पृथ्वीराज कपूर आदि थे।
राजेंद्र रघुवंशी (20 अप्रैल 1920 - 26 फरवरी 2003) और बिशन खन्ना ने मिलकर 1 मई 1942 को आगरा कल्चरल स्क्वाड की स्थापना की थी जो की बाद में 25 मई 1943 को इप्टा के रूप में परिवर्तित हो गया। राजेंद्र रघुवंशी ने नाटक में अभिनय, लेखन, गायन, नृत्य जैसे सभी पक्षों को प्रस्तुत किया और इसके अलावा वे कविता, गीत, कहानी, उपन्यास, वार्ता, रिपोर्ताज, संस्मरण, लेख, साहित्य आदि विभिन्न विधाओं के धनी थे। उन्होंने 40 साल से अधिक समय तक पत्रकारिता की और खेल, बच्चों का कोना आदि नए कॉलम सृजित किये।
(जानकारी और चित्र आगरा इप्टा के फेसबुक पेज से साभार)
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