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हम कहेंगे अमन,
हम कहेंगे मोहब्बत,
हम कहेंगे जद्दोजहद,
हम कहेंगे इंसाफ़,
इंसानियत की बोली को नए सिरे से रचेंगे हम,
नए शब्द बनाएंगे अर्थों से,
हम लेंगे ऐसे बदला तुमसे,
तुमसे ...
भगत सिंह जैसा टोप पहनकर,
चन्द्रशेखर आजाद की तरह मूछों पर ताव देंगे
तुम्हारे सामने खड़े होकर पढ़ेंगे रामप्रसाद बिस्मिल के शेर,
हम लेंगे ऐसे बदला तुमसे,
तुमसे ...
चटक - मटक से कपड़े पहन कर,
कन्धों पर बच्चों को बिठाये,
हम एक साथ जायेंगे देखने मेला रल मिलकर,
अरे इश्क की ताल पर थिरकेंगे,
धिन धिनक धिन - धिन धिनक धिन,
अरे मोहन सिंह और बुल्ले शाह को याद करके,
हम बय्यां - बय्यां नाचेंगे,
धिन धिनक धिन - धिन धिनक धिन,
हम लेंगे ऐसे बदला तुमसे,
तुमसे ...
धरती से कान लगाकर सुनेंगे हम,
शाह - हुसैन और दामन (?) को बातें करते,
और गुलाम अली के मुंह से गुरु अर्जुन के शबद,
और सुब्बुलक्ष्मी के मुंह से नानक की वाणी,
श्रवण सिंह (?) के मुंह से सुनेंगे हम फरीद के श्लोक,
और फ़ैज़ के तराने,
मोईन डागर ज़हीरुद्दीन से ओम शिव स्तुति
हम लेंगे ऐसे बदला तुमसे....¡!
-अमरजीत चन्दन
Image Courtesy: Hindustan Times
Cover art and Curartion: Irfan
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