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Podcast: Listen with Irfan
Episode:

Meri Filmi Atmakatha 3 | Balraj Sahni | Recited by Irfan

Category: Arts
Duration: 00:27:18
Publish Date: 2022-10-28 15:39:57
Description:

कॉलेज का दौर खत्म हुआ। जीवन के क्षेत्र में उतरने का समय आया। जीवन के अखाड़े में उतरते ही ऐसी चोटें पड़ीं कि कुछ मत पूछिए। नाक से खून बहने लगा, मुंह माथा सूज गया, बांह रूमाल में टांगनी पड़ी।

कवि ने बड़े सुंदर शब्दों में चित्र खींचा है-

'इकबाल' मेरे इश्क ने सब बल दिए निकाल

मुद्दत से आरजू थी सीधा करे कोई।

(बलराज साहनी की किताब 'मेरी फ़िल्मी आत्मकथा' सबसे पहले अमृत राय द्वारा सम्पादित पत्रिका 'नई कहानियां' में धारावाहिक रूप से प्रकाशित हुई।

बलराज जी के जीवन काल में ही यह पंजाबी की प्रसिद्ध पत्रिका प्रीतलड़ी में भी यह धारावाहिक ढंग से छपी।

1974 में जब यह किताब की शक्ल में आई तो फिल्म प्रेमियों और सामान्य पाठकों ने इसे हाथो हाथ लिया।)

Cover Art: Irfan

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