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Podcast: Listen with Irfan
Episode:

Meri Filmi Atmakatha 11 | Balraj Sahni | Recited by Irfan

Category: Arts
Duration: 00:15:28
Publish Date: 2022-11-05 17:25:28
Description:

"अमीर घरों के लोग भी हमारे साथ दोस्ती करने के लिए बेचैन रहते थे। फिल्म स्टार के साथ उठने बैठने से उनकी इज्जत बढ़ती थी। जब हम उनकी घटिया पार्टियों से उकताकर पीछा छुड़ाते तो वह इप्टा या कम्युनिस्ट पार्टी को चंदा देकर हमें ललचाते।

अभिनेता और खासकर अभिनेत्री बुर्जुआ समाज के लिए एक खिलौना हैं। बिल्कुल इस तथ्य का हमें बिल्कुल ज्ञान नहीं था। अभिनेत्री को दिए जाने वाले सम्मान में बहुत सा तिरस्कार का भी अंश होता है, यह भी मुझे नहीं पता था। एक दिन जब अखबार में पढ़ा कि रेस में दौड़ने वाली घोड़ियों के नाम बेगमपारा, नरगिस, दमयंती आदि रखे गए हैं तो मुझे बहुत गुस्सा आया।

मेरा कर्तव्य था कि उस समय अपनी पत्नी की ढाल बनता। उसके कलात्मक जीवन की कद्र करता, रक्षा करता। उसे फिजूल के झमेलों से बचाता और पारिवारिक जीवन की जिम्मेदारियां अपने ऊपर ले लेता।

पर मैं अपनी संकीर्णता के कारण मन ही मन में दम्मो (मेरी पत्नी दमयंती) की प्रसिद्धि और सफलता से ईर्ष्या करने लगा था। वह स्टूडियो से थकी हारी हुई आती तो मैं उससे ऐसा सुलूक करता जैसे वह कोई गलती करके आई हो। मैं चाहता कि वह आते ही घर के कामकाज में लग जाए, जो कि मेरी नजर में उसका असली काम था। अपने बड़प्पन का दिखावा करने के लिए मैं इप्टा और कम्युनिस्ट पार्टी के अनावश्यक काम भी करने लग जाता।

मैं मर्द था। जिन संस्कारों में पला था उनके अनुसार मर्द हर हालत में ऊंचा था। और जिन संस्कारों में दम्मो पली थी उनके अनुसार पतिपरायणता उसका पहला कर्तव्य था। बेचारी बिना किसी शिकायत के वह सारा भार उठती गई, जिसे उठाने का उसमें सामर्थ्य नहीं था।

इन बातों को याद करके मेरे दिल में टीस उठती है। दम्मो एक अमूल्य हीरा था, जो उसके माता-पिता ने एक ऐसे व्यक्ति को सौंप दिया था, जिसके दिल में न उसकी कद्र थी न ही कोई कृतज्ञता का भाव था।

हमारे इर्द-गिर्द एक तूफान सा मचा रहता था।"

~ बलराज साहनी, मेरी फिल्मी आत्मकथा

(प्रसिद्ध अभिनेता और लेखक बलराज साहनी ने अपनी किताब 'मेरी फ़िल्मी आत्मकथा' अपनी मृत्यु से एक साल पहले यानी 1972 पूरी की थी। यह सबसे पहले अमृत राय द्वारा सम्पादित पत्रिका 'नई कहानियां' में धारावाहिक रूप से प्रकाशित हुई। फिर उनके जीवन काल में ही यह पंजाबी की प्रसिद्ध पत्रिका प्रीतलड़ी में भी यह धारावाहिक ढंग से छपी।

1974 में जब यह किताब की शक्ल में आई तो फिल्म प्रेमियों और सामान्य पाठकों ने इसे हाथों हाथ लिया।)

Narrator, Producer and Cover Designer : Irfan

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