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Description:
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लोग क्या कहेगे इस बात पर हम यु उलझते जा रहे है। We are getting entangled on what people will say. | आज के इस शीर्षक में , मैं यहाँ कुछ नामी कुछ, कुछ बेनाम कवियों की कविताये यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ। कुछ खामिया अवश्य रह गई होगी , क्यों की मैं मनुष्य हूँ भूल के पात्र हूँ। इसलिए क्षमा का अधिकारी भी हूँ। जीवन का फलसफा भी बड़ा अजीब है उसे कोई समझ नहीं पाया , जिसे हम समझ पाए , वो हमे नहीं समझ पाया। बस सब अपनी अपनी मौज में गुज़र गए । मंज़िल kisi ko नहीं mili। सिर्फ तसल्ली कर लेते है लोग बाकि तलाश तो ज़िन्दगी के बाद भी जारी रहती है।
कविता हमारे जीवन से सम्बंधित कुछ आयामों को परिभाषित करती है। कुछ प्रेरणा , कुछ शिक्षा कुछ कटाक्ष से हमे जगा जाती है। कुछ कवितायेँ मुद्दों को कहती है , तो कुछ दिल के तारों को छेड़ जाती है। कुछ चुभन दे जाती है। मुश्किलें कब रूकती है क्या रुक जाना , या उससे मुँह फेर लेना छुटकारा है । ख़ुशी और ग़म तो एक धूपछांव से है। बहुत सारी बातें प्रश्न बन हमरे सामने खड़ी है। इनायतेँ होती है उसका कोई मोल चुकाया नहीं जाता। बस दिल से शुक्राना अदा कर दीजिये उन्हें सुकून मिल जायेगा।
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