|
इस हफ्ते सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी कोटे में सब कैटेगराइजेशन (उप-वर्गीकरण) के फैसले के विरोध में भारत बंद और केंद्र सरकार द्वारा यूपीएससी में लेटरल एंट्री के फैसले को वापस लेने के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई. इस हफ्ते चर्चा में बतौर मेहमान दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर और स्तम्भकार (कॉलमनिस्ट) अदिति नारायण पासवान, जेएनयू के प्रोफेसर हरीश वानखेड़े और न्यूज़लॉन्ड्री टीम से स्तंभकार आनंद वर्धन और प्रबंध संपादक मनीषा पांडे शामिल हुईं. वहीं, चर्चा का संचालन न्यूज़लॉन्ड्री के प्रबंध संपादक अतुल चौरसिया ने किया. चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल कहते हैं, “सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी, एसटी कोटे में सब कैटेगराइजेशन (उप-वर्गीकरण) के फैसले का बड़े पैमाने पर विरोध किया जा रहा है, आखिर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के पीछे तकनीकी कारण क्या हैं?” इस सवाल के जवाब में आनंद कहते हैं, “संविधान में आरक्षण का प्रावधान सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर किया गया है. आप देखेंगे कि पिछले कुछ सालों में, कई राज्यों में एक नया सामाजिक वर्ग तैयार हुआ है. जैसे 2005 के बाद बिहार में नीतिश कुमार महादलित वर्ग की एक नई अवधारणा के साथ सामने आते हैं. इससे एक नया राजनीतिक और सामाजिक वर्ग तैयार हुआ, जिसकी अपनी अलग जरूरतें और मांग थी .उसी प्रकार उत्तर-प्रदेश में दलित समुदाय के अंदर जाटव और गैर-जाटव का एक अलगाव दिखता है. इस प्रकार कालांतर में आए सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को लिया है सुनिए पूरी चर्चा -
टाइमकोड्स 00:23 - इंट्रो और ज़रूरी सूचना 3:47 - सुर्खियां 12:55 - आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला और भारत बंद 54 :16 - यूपीएससी में लेटरल एंट्री पर चर्चा 01:14:22 - सब्सक्राइबर्स के पत्र 01:18:06 - सलाह और सुझाव
ट्रांसक्रिप्शन: संध्या वत्स/तस्नीम फातिमा प्रोड्यूसर: प्रशांत कुमार/आशीष आनंद एडिटिंग: उमराव सिंह
Hosted on Acast. See acast.com/privacy for more information. |